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अरावली की पहाड़ियों मे नज़र आई तितलियों की दुर्लभ प्रजातियाँ, पढ़िए क्या है विशेषता !

रेवाड़ी

देव श्योकंद

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियों में तितलियों की दुलर्भ श्रृंखला नजर आई हैं। तितलियों पर पहली बार किए गए सर्वेक्षण में अरावली क्षेत्र में 60 प्रजातियों की पहचान की गई। इनमें बहुत से खास किस्म की तितलियां भी शामिल हैं। 5 से 6 सदस्यों वाली 10 टीमों ने मंगलवार को रेवाड़ी के अरावली क्षेत्र में लगातार 6 घंटे तक सर्वेक्षण किया, जिसमें खूबसूरत तितलियां नजर आईं। वन्यजीव विभाग का अब अगला पड़ाव यमुनानगर के कलेसर स्थित राष्ट्रीय उद्यान है, जहां भी इसी तरह का सर्वेक्षण होगा। अक्टूबर के पहले सप्ताह में दक्षिणी हरियाणा के अन्य जिलों में भी इस तरह के और सर्वेक्षण होने की संभावना है।

10 गांवों का सर्वेक्षण करने पहुंचे देशभर के विशेषज्ञ

दरअसल, रेवाड़ी जिले का एक बड़ा हिस्सा अरावली क्षेत्र में आता है। अभी तक अरावली क्षेत्र में कोई बड़ा सर्वेक्षण नहीं हुआ, लेकिन तितलियों पर पहली बार हरियाणा में सर्वेक्षण की शुरुआत रेवाड़ी से हुई है। अरावली से लगते जिले के 10 गांवों में देशभर के 50 से ज्यादा एक्सपर्ट सर्वे करने पहुंचे। गुरुग्राम सर्कल के मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एमएस मलिक ने कहा कि तितलियों की उपस्थिति एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है।

कम समय में सर्वेक्षण से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इस क्षेत्र में पहचानी गई प्रजातियों के साथ, हम अपनी संरक्षण रणनीतियों की बेहतर योजना बनाने में सक्षम होंगे। इस बात पर ध्यान केंद्रित करते हुए कि पारिस्थितिकी तंत्र को और बेहतर बनाने के लिए कौन-से पौधे लगाए जाने चाहिएं।

दिल्ली-मुम्बई के अलावा देशभर से आए एक्सपर्ट

रेवाड़ी जिले के खोल खंड का बड़ा एरिया अरावली में आता है। मंगलवार सुबह मुम्बई, दिल्ली, फरीदाबाद सहित देशभर के अन्य बड़े शहरों से 5 से 6 सदस्यों की कुल 10 टीमें गांव पालड़ा, अहरोद, बासदूदा, खोल, मनेठी, भालकी, माजरा, नांधा, बलवाड़ी व खालेटा में पहुंची। 6 घंटे तक यहां एक्सपर्ट टीम ने तितलियों पर सर्वेक्षण किया। हरियाणा वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव वार्डन जगदीश चंदर ने भी सर्वेक्षण में साथ रहे। अधिकारियों ने बताया कि तितलियों की सामान्य और असामान्य दोनों प्रजातियों की पहचान के साथ सर्वेक्षण सफल रहा। तथ्य यह है कि 6 घंटे के भीतर 1 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 60 प्रजातियों की पहचान की गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस क्षेत्र के पेड़ और झाड़ियों की संरचना बहुत अच्छी है।

असामान्य तिलतिलां भी नजर आईं

अधिकारियों ने कहा कि धारीदार बाघ तितली, पीली पैंसी तितली, बेदाग घास पीली तितली और आम गुलाब की तितली आदि लोकप्रिय प्रजातियां यहां देखने को मिलीं। इनके अलावा भी कुछ अन्य तितलियां इस सर्वेक्षण में नजर आई हैं, जो असमान्य हैं।

इस मौसम में अधिक दिखाई देती है

अधिकारियों ने कहा कि गर्मी के मौसम में सबसे अधिक तितलियां दिखाई देती हैं, जो लारवा प्रजनन अवस्था के ठीक बाद आती हैं। अक्टूबर के पहले सप्ताह तक तितलियों के दर्शन होने की संभावना है। अधिकारियों की मानें तो एक तितली की लाइफ एक माह तक ही होती है। 30 सितंबर गुरुवार को यमुनानगर के कलेसर स्थित राष्ट्रीय उद्यान में इसी तरह का सर्वेक्षण होगा। उसके बाद दक्षिणी हरियाणा के अन्य जिलों में अक्टूबर के पहले सप्ताह में और भी सर्वेक्षण होने की संभावना है।

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