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दोषी करार होने के बाद भी जेल जाने से बच सकते हैं चौटाला

आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दोषी करार दिए जाने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को जेल जाने से राहत मिल सकती है। जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में चौटाला अपनी 10 साल की सजा पूरी कर चुके हैं।

ओमप्रकाश चौटाला के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला अदालत में जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले के साथ-साथ चलता रहा, जिस कारण चौटाला का काफी समय हिरासत में बीत चुका है।

इस हिरासत अवधि को जेल में बिताया समय मानने का अनुरोध चौटाला के वकील अदालत में कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी चौटाला को राहत प्रदान कर सकता है। दिल्ली की राऊज एवन्यू कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में चौटाला को दोषी मानते हुए अपना फैसला सुरक्षित रखा हुआ है।

चौटाला के विरुद्ध अदालत 26 मई को सजा सुनाएगी।

सीबीआइ ने 26 मार्च 2010 को चौटाला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

चार्जशीट में चौटाला को 1993 से 2006 के बीच उनकी वैध आय से अधिक 6.09 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

साल 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ओमप्रकाश चौटाला की तीन करोड़ 68 लाख रुपये की संपत्तियों को जब्त कर लिया था। इन संपत्तियों में ओम प्रकाश चौटाला के फ्लैट, प्लाट और जमीन शामिल थे।

जब्त की गई संपत्तियां नई दिल्ली, पंचकूला और सिरसा में स्थित हैं। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में मनी लांड्रिंग के तहत दर्ज एफआइआर को लेकर हुई थी।

ओमप्रकाश चौटाला को जनवरी, 2013 में जेबीटी घोटाले में दोषी करार दिया गया था। इनेलो सुप्रीमो को प्रीवेंशन आफ करप्शन एक्ट में सात साल और षड्यंत्र में दोषी पाए जाने पर 10 साल की सजा हुई थी, जो वह पूरी कर चुके हैं।

आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दोषी करार दिये गये चौटाला को कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल की सजा हो सकती है। जिस दिन चौटाला को इस मामले में दोषी करार दिया गया, उस दिन वह कोर्ट में उपस्थित थे।

वहां से वापस आने के बाद चौटाला यमुनानगर में अपनी पार्टी के कार्यकर्ता के घर एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।

पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला के वकील हर्ष कुमार शर्मा का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति के इस मामले में चौटाला को कम से कम सजा की अपील कोर्ट में की जाएगी।

26 मई को सजा पर बहस के दौरान उनका प्रयास यही रहेगा कि सजा कम से कम हो। वे सजा में रियायत के लिए अन्य तर्कों के साथ पूर्व सीएम की उम्र और 90 प्रतिशत तक डिसएबिलीटी (अपंगता) की बात भी रखेंगे।

यह भी अदालत को बताएंगे कि चौटाला 10 साल की सजा काट चुके हैं। चौटाला कस्टडी में जो समय बीता चुके हैं, वह इस केस की कस्टडी में भी शामिल माना जाए।

सुप्रीम कोर्ट का हाल ही में निर्णय आया है कि कोई भी आदमी किसी केस में कस्टडी में है और वह किसी दूसरे केस के अंदर जांच या ट्रायल में शामिल है तो पहले केस में दूसरे केस की कस्टडी की अवधि को शामिल माना जा सकता है।

हर्ष कुमार शर्मा के अनुसार इस केस में वह हाईकोर्ट में भी अपील करेंगे और प्रयास होगा कि जल्दी से जल्दी अपील स्वीकृत हो और सुनवाई शुरू हो।

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