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पूर्व विधायक परमेंद्र ढ़ुल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर किसानों को राहत देने की मांग की

जुलाना विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक परमेन्द्र सिंह ढुल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर किसानों को राहत प्रदान किये जाने की मांग रखी। उन्होंने मांग रखी है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का पूरा प्रीमीयम सरकार द्वारा वहन किया जाए ताकि किसान को इस आर्थिक मुश्किल समय में सरकार की तरफ से और अधिक भरोसा व सहायता मिले। उन्होंने कहा कि जहां किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के लिए पूर्ण कर्ज़ा माफी की दिशा में सार्थक कदम बढ़ाएं जाने आवश्यक है, वहीं देशभर में स्वास्थ्य कर्मचारियों को दी जाने वाली 50 लाख रुपये की कोरोना बीमा योजना में किसानों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
ईमेल के जरिये भेजे इस पत्र में उन्होंने कहा कि इन सुझावों के पूरा होने से हताश हो चुके किसानों में भी पुनः नई उम्मीद मिलेगी और हौंसले का संचार होगा तथा सरकार के प्रति और अधिक विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की एक सिफारिश का हवाला देते हुए कहा कि जब तक किसान की आर्थिक स्थिति दोगुने मुनाफे वाले नहीं हो जाती तब तक उससे कर्ज वसूली न की जाए एवं इसके अलावा कर्ज के ब्याज पर भी भारी राहत दी जाये ताकि इस आर्थिक संकट के समय पर किसान को भी एक बड़ी राहत मिले जिससे कि वह आने वाली विपदा से लड़ने के लिए स्वयं को व समस्त राष्ट्र को तैयार कर सके।
उन्होंने कहा कि आज देशभर में कोरोना की महामारी की वजह से लगभग सभी वर्गों को विभिन्न दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय पर सरकार, प्रशासन व सभी देशवासी अपनी क्षमता से अधिक योगदान देते हुए इस गम्भीर संकट के समय में महामारी के विरुद्ध लड़ने व पार पाने में दिन रात एक किये हुए हैं।

किसानों के बारे में सोचना चाहिए सरकारों को….

परमेन्द्र ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकारों ने आर्थिक पैकेज की घोषणा के अलावा मजदूरों, श्रमिकों, मध्यम वर्गीय परिवारों एवं उद्योगों के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं लागू करने की घोषणाएं की हैं ताकि कोरोना से जितने के बाद अर्थव्यवस्था को भी पुनः पटड़ी पर लाया जा सके तथा देशवासियों को अधिक से अधिक राहत प्रदान की जा सके। ऐसे में किसान के रूप में एक वर्ग ऐसा है जो दिन रात एक करते हुए अपने हौंसले से भी एक कदम आगे चलकर भारतवर्ष के लोगों का पेट भरने का कार्य कर रहा है। महामारी के बीच ऐसी परिस्थिति में भी किसान अपनी जान माल की परवाह न करते हुए न केवल अनाज की पैदावार पूरी किये हुए है अपितु अपनी जान की परवाह न करते हुए वह फल, सब्जी, दूध, पोल्ट्री आदि की भी लगातार सप्लाई में भी लगा है। वहीं लगातार होते मौसम बदलाव से किसान को कहर का भी सामना करना पड़ा है व बीते कुछ वर्षों से लगभग प्रत्येक सीज़न में उसकी अधिकांश फसल बर्बाद हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकारी निर्देशो के अनुसार फसल बीमा का प्रीमियम केन्द्र तथा राज्य सरकार एवं किसान आपस मे मिल कर वहन करते हैं। कहने को बीमा का प्रीमियम भले ही नाममात्र हो लेकिन गरीब किसान के लिए यह भी उसकी फसल को पालने के खर्चे में जुड़ जाता है। विशेषकर छोटी जोत के किसानों (जो कि अधिक संख्या में है) के लिए ऐसा ख़र्च ज्यादा है। चूंकि हर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी निर्धारित नहीं है, ऐसे में नुकसान या फायदे का आंकलन बैठाना कठिन है।
उन्होंने कहा कि जहां सरकार द्वारा अलग अलग सेक्टरों के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणाएं की जा रही हैं, वहीं देशभर का किसान वर्ग सरकार की तरफ टकटकी लगाए उम्मीद में बैठा है। मैं स्वयं एक किसान परिवार में पैदा हुआ हूँ और उनकी इस उम्मीद में भागीदार भी हूँ। कोरोना का कहर सभी वर्गों पर एक बड़ी दिक्कत एवं चुनौती ले कर आया है। ऐसे में किसान को औरों से ज्यादा दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है।

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