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किसानों ने साफ कहा – राजनीतिक दलों के नेता आंदोलन में ना आएं , चौथे दिन भी धरना जोश के साथ रहा जारी

नई दिल्ली । ( Dev Sheokand ) 

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन चौथे दिन भी जारी रहा। आंदोलनरत किसानों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का सशर्त बुराड़ी ग्राउंड जाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। शाम साढ़े चार बजे किसान नेताओं ने प्रेस से कहा- बुराड़ी मैदान ओपन-जेल जैसा है। हम वहां नहीं जाएंगे। साथ ही ऐलान किया है कि दिल्ली से लगते सिंघु-टिकरी के साथ ही दिल्ली-जयुपर, गाजियाबाद और मथुरा सीमा को भी जाम किया जाएगा।

एक दिसंबर से राज्यों में भी प्रदर्शन किया जाएगा। बीकेयू क्रांतिकारी (पंजाब) के प्रदेश अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि किसानों ने सरकार से वार्ता के लिए 7 सदस्यों का संयुक्त मोर्चा भी बनाया है। किसानों के इस आंदाेलन में राजनीतिक दल के नेता न आएं। उधर, हैदराबाद से लौटते ही गृहमंत्री अमित शाह ने रात 10 बजे भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के साथ मीटिंग की। सूत्रों के अनुसार सरकार कुंडली बॉर्डर पर प्रतिनिधिमंडल भेजने या किसान नेताओं को दिल्ली बुलाने पर विचार कर रही है। चर्चा यह भी हुई कि आंदोलन लंबा चला और दिल्ली के रास्ते जाम हो गए तो इससे कैसे निपटेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात के जरिए रखा सरकार का पक्ष

इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 18वें संस्करण जरिए सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा, ‘बीते दिनों हुए कृषि सुधारों ने किसानों को नए अधिकार और नए अवसर दिए हैं। किसानों की वर्षों से कुछ मांगें थीं। उन्हें पूरा करने के लिए हर राजनीतिक दल ने वादा किया। हमने उन्हें पूरा करने की दिशा में कदम उठाया है।’केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव को वैसे तो किसानों ने शनिवार रात को ही ठुकरा दिया था।

बावजूद इसके अपने फैसले के औपचारिक ऐलान के लिए किसान संगठनों ने तीन घंटे लंबी मीटिंग की। मीटिंग कुंडली बॉर्डर पर सुबह 10 से सवा एक बजे तक चली। मीटिंग में केवल पंजाब के 30 जत्थों के प्रतिनिधि शामिल थेे। शाह की पेशकश पर किसान नेताओं ने 3 आपत्तियां जताई। पहला- सरकार ने र्वाता के लिए शर्त क्यों लगाई। दूसरा- दिल्ली जा रहे थे तो सरकार ने क्यों रोका। अब हम यहां बैठ गए तो बुराड़ी क्यों बुला रहे हैं। मीटिंग में संदेह जताया गया कि सरकार उन्हें भी बुराड़ी ले जाकर मैदान में बंद कर सकती है। तीसरा- निमंत्रण पत्र पत्र सिर्फ पंजाब के 30 जत्थों को संबोधित करते हुए लिखा गया है। किसानों ने इसे फूट डालने की साजिश बताई। आंदोलन अकेले पंजाब का नहीं बल्कि पूरे देश के किसानों का है।

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