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ऐलनाबाद उपचुनाव मे सिर्फ नाम का ही होगा गठबंधन , पढ़िए ताज़ा सियासी अपडेट !

चंडीगढ़

देव श्योकंद

उपचुनाव की घोषणा के साथ ही सभी पार्टियों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। अभी तक की कार्रवाई भी भाजपा ने अन्य दलों के पछाड़ते हुए इसके लिए रणनीति तैयार करनी भी शुरू कर दी है और चुनाव प्रभारी नियुक्त करते हुए 3 अक्टूबर को चुनाव समिति की बैठक भी बुला ली है। हालांकि चुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा व जजपा नेताओं की तरफ से दावा किया जाता रहा है कि उनका गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा और अब इस बारे में स्थिति सपष्ट भी होने लगी है।

वीरवार को बीजेपी की मीटिंग के बाद पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने बताया कि बीजेपी और जेजेपी संयुक्त रूप से यह चुनाव लड़ने जा रही है। चुनाव में गठबंधन की तरफ से उम्मीदवार कौन होगा इस बारे में भी जल्द ही फैसला कर लिया जाएगा। दूसरे ओर अभी तक जो संभावना बनती दिख रही है उसके अनुसार चुनाव बीजेपी के चिन्ह पर ही लड़ा जाएगा और उम्मीदवार भी भाजपा की तरफ से होगा। इस चुनाव में भी भाजपा अपने उम्मीदवार के साथ पूरे दमखम के साथ उतरने वाली है। बरौदा उपचुनाव की तरह ऐलनाबाद में भी सिर्फ नाम का ही गठबंधन होगा और प्रत्याशी और निशान दोनों ही भाजपा के होंगे।

इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि बीते दो चुनावों में यहां पर भाजपा काफी मजबूत स्थिति में थी और उनका प्रत्याशी अच्छे खासे वोट लेकर दो नंबर पर रहने में कामयाब हुआ था। हालांकि ऐलनाबाद एरिया अजय चौटाला व दुष्यंत चौटाला का गृहक्षेत्र माना जाता है लेकिन 2019 के चुनाव में उनके प्रत्याशी को सिर्फ 4 प्रतिशत 6569 वोट ही मिल पाए थे।

भाजपा की दिली ईच्छा : चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा लड़े चुनाव

इस चुनाव को लेकर जो रूझान सामने आ रहे हैं उसके अनुसार भाजपा भी चाहती है कि संयुक्त किसान मोर्चा भी अपना उम्मीदवार उतारे। भाजपा की इस दिली ईच्छा के पीछे कई छुपे हुए कारण हैं जो सीधा उसको फायदा पहुंचाते हैं। भाजपा के एक बड़े नेता ने बताया कि किसानों को भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमानी चाहिए और हो सके तो गुरनाम सिंह चढूनी को ही उम्मीदवार बनाना चाहिए। दरअसल भाजपा की यह ईच्छा किसान नेताओं के लिए एक गुगली है। अगर इस चुनाव में किसान मोर्चा अपना उम्मीदवार खड़ा कर देता है तो यह चुनाव बीजेपी की हार-जीत की बजाय किसानों की हार जीत का बन जाएगा। अगर किसानों का उम्मीदवार यहां पर हार जाता है तो उसका सीधा असर आंदोलन पर पड़ेगा जिसका फायदा सरकार को मिलेगा। 

अगर संयुक्त किसान मोर्चे का उम्मीदवार जीत भी जाता है तो एक सीट से ज्यादा कुछ असर होने वाला है नहीं और बीजेपी यह जताने में सफल रहेगी यह आंदोलन राजनीतिक प्रेरित है और इनका मकसद ही चुनाव लड़ना है। दूसरी तरफ मोर्चे के प्रत्याशी का मुकाबला भी अभय चौटाला से होगा जिन्होने आंदोलन के पक्ष में विधायक पद से इस्तीफा दिया था। चुनाव में संयुक्त किसान मोर्चा अपना उम्मीदवार उतारेगा या बरौदा उपचुनाव की तरह ही बीजेपी जेजेपी का विरोध करेगा इस बारे में आज मोर्चे की मीटिंग में फैसला लिया जाएगा।

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