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प्रदेश में सामने आया एक और घोटाला /लाॅकडाउन के दौरान बड़े स्तर पर हुआ रजिस्ट्री घोटाला

चंडीगढ़ ।

गड़बड़ करने वाले न दिन देखते हैं और न रात। जिस तरह शराब घोटाला करने वालों के लिए लॉकडाउन की अवधि कारगर साबित रही, उसी तरह से संपत्तियों की रजिस्ट्री करने वाली अथारिटी के लिए भी लॉकडाउन लाभकारी साबित हुआ है। प्रदेश सरकार ने लोगों को राहत देने तथा राजस्व जुटाने की मंशा से रजिस्ट्रियां खोलने की अनुमति दी थी, लेकिन न केवल अधिकारियों बल्कि लोगों ने मिलकर रजिस्ट्रियां करने में बड़ा गड़बड़झाला कर डाला है। प्रदेश सरकार को आशंका है कि लॉकडाउन की अवधि में संपत्तियों की रजिस्ट्री में बड़ा घोटाला हुआ है। इसकी शिकायत खुद कुछ विधायकों व आम लोगों ने प्रदेश सरकार से की है।

रजिस्ट्रियों में गड़बड़ी को लेकर गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, अंबाला और करनाल की सबसे ज्यादा शिकायतें हैं। शिकायतों में सरकार को बताया गया कि अधिकारियों से मिलीभगत कर अवैध कालोनियां काट दी गई और फिर इन संपत्तियों की रजिस्ट्री की गई। कई जिलों में अनाधिकृत कालोनियों के प्लाटों व मकानों की रजिस्ट्री अधिकारियों ने कर दी है। इस खेल में करोड़ों के वारे-न्यारे किए गए हैं।विधायकों व फील्ड से मिली शिकायतों के आधार पर हरियाणा सरकार ने अपने स्तर पर इसकी जांच आरंभ कर दी है। जिलों से मिलने वाले इनपुट के आधार पर सरकार किसी नतीजे पर पहुंचेगी, लेकिन तब तक के लिए प्रदेश सरकार ने 17 अगस्त तक हरियाणा की तहसीलों में रजिस्ट्रियां करने पर रोक लगा दी है। इससे हालांकि राजस्व का नुकसान बढऩे की आशंका है, लेकिन घोटाला रोकने के लिए कड़े फैसले जरूरी हैं।हरियाणा सरकार के निर्देश पर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं गृह सचिव विजयवर्धन ने रजिस्ट्रियों पर रोक लगाने संबंधी आदेश जारी किए हैं। यह आदेश सभी मंडलायुक्तों व जिला उपायुक्तों के पास भेज दिए गए हैं। जिला उपायुक्तों से कहा गया है कि वह निचले स्तर पर इन आदेशों का सख्ती से अनुपालन कराएं।

 

हरियाणा में 22 अप्रैल से रजिस्ट्रियां आरंभ की गई थी। मार्च में लॉकडाउन के कारण सरकार को राजस्व का मोटा नुकसान हुआ। हालांकि जब से रजिस्ट्री आरंभ हुई, तब से राजस्व में करीब 400 से 500 करोड़ रुपये की आय भी आई, मगर सरकार को शिकायतें मिलीं की अधिकारियों के साथ मिलकर मोटा गोलमाल किया जा रहा है। सबसे ज्यादा शिकायतें गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, अंबाला, करनाल, झज्जर और सोनीपत जिलों की हैं।गुरुग्राम जिले की तहसीलों में कई ऐसे अफसर कार्यरत हैं, जिन्हेंं इस घोटालों का मास्टर माइंड माना जाता है। वह अपनी ताकत के बूते बरसों से एक ही सीट पर जमे हुए हैं। ऐसे लोगों को राजनीतिक संरक्षण भी कम नहीं है। अपने राजनीतिक संपर्कों के माध्यम से यह मास्टर माइंड सरकार के सिस्टम में घुसने तक के लिए प्रयासरत हैं।गुरुग्राम, सोनीपत, झज्जर और फरीदाबाद जिले ऐसे हैं, जहां राजस्व, एचएसआइआइडीसी, उद्योग और आबकारी विभागों में पोस्टिंग के लिए अधिकारी तरसते हैं। उन्हेंं लगता है कि इन जिलों में सबसे ज्यादा और मोटा माल है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयवर्धन के अनुसार 17 अगस्त तक जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने के साथ ही ट्रांसफर डीड भी नहीं करने का फैसला लिया गया है। सूत्रों के अनुसार गलत तरीके से कुछ रजिस्ट्रियां हुई हैं। अंदरूनी तौर पर सरकार अपने सिस्टम से इसकी जांच करा रही है।

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