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दोस्ती का उदाहरण भारत और बांग्लादेश की मित्रता,पढ़िए संपादकीय विशेष में

नई दिल्ली

*हर मौसम में कायम रहने वाली भारत-बांग्लादेश मित्रता—-* भारत ने हमेशा से ही अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों को बनाया, उन्हें विकसित किया और उन्हें निभाया । बहरहाल, सभी को खुश करना संभव नहीं है खासकर जब आपके पड़ोसी देश (पाकिस्तान) के हित दुश्मनी से भरे हो । भारत के पड़ोसी देश जिनके साथ उसकी सीमाएं सांझी होती है , उनमे बांग्लादेश भी एक मुल्क है जिसके संबंध भारत के साथ उसकी आजादी के समय से ही बहुत बेहतर संबंध रहे हैं व जिनमे कुछेक मामलों को छोड़ दें तो दोनों एक दूसरे के साथ सामाजिक , सांस्कृतिक सभ्यताएं और सबसे ऊपर आर्थिक संबंध सांझा करते हैं । बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम को भारत ने सहयोग दिया और उसे नई ऊर्जा प्रदान की । भारत ही सबसे पहला राष्ट्र है जिसने 1971 में आजादी मिलने के बाद बांग्लादेश को मान्यता प्रदान की। उसी समय से बांग्लादेश भारत को एक दोस्त, एक बाजार तथा एक संरक्षक के रूप में देखता है। बांग्लादेश के साथ वार्ता के विभिन्न स्तरों पर हमारे बहुआयामी- संबंध विकसित हो रहे हैं । भारत, बांग्लादेशी छात्रों को हर साल छात्रवृति देने के अलावा 5 लाख छात्रों को भारत में पढ़ाई करने के लिए वीजा भी प्रदान करता है।। दोनों देशों के बीच सांझी नदियों के जल बंटवारे पर किए गए समझौतों की एक पूरी श्रंखला है तथा दोनों ही देशों के बीच 54 सांझी नदियां बहती है। इन दोनों देशों ने सन 1996 में गंगा के जल के बंटवारे को लेकर एक समझौता किया था । आर्थिक मोर्चे पर दक्षिण एशिया में भी , बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी है। सन 2009- 10 और 2015 -16 के मध्य इन देशों के बीच का व्यापार घाटा 164.4% भारत के पक्ष में आकां गया । भारत द्वारा बांग्लादेश में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 3.11 बिलियन अमेरिकी डॉलर था । सन 2018-19 के अप्रैल से मार्च के बीच दोनों देशों में 9.21 बिलियन अमेरिकी डालर का निर्यात हुआ जबकि इसी अवधि के दौरान बांग्लादेश से भारत में 11.22 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आयात हुआ। अपने पड़ोसी देशों की तुलना में भारत बांग्लादेश से सबसे लंबी जमीनी सीमाएं साझा करता है जो 4096.7 किलोमीटर लंबी है। दोनों देशों के बीच विभिन्न नौसेना और थलसेना के सांझे ‘सैनिक- युद्धाभ्यास’ होते रहते हैं। वर्तमान में बांग्लादेश, भारत से 1160 मेगावाट बिजली आयात करता है । दोनों देशों ने अपनी सीमाओं को और मजबूत करने के लिए 7 समझौतों पर हस्ताक्षर किए तथा 3 परियोजनाओं का उद्घाटन किया । इस क्षेत्र में दोनों देशों के मध्य संबंध दिनोंदिन मजबूत होते जा रहे हैं और बांग्लादेश हमारा एकमात्र विश्वसनीय सहयोगी है। जरूरत के समय आर्थिक एवं अन्य सहायता के लिए बाढों और प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला करने के लिए भारत हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा है। ‘कोलकाता -खुलना’ व ‘ढाका- कोलकाता’ के बीच रेल सेवाएं बहुत बढ़िया ढंग से चल रही है जबकि ‘अगरतला-अखौरा’ मार्ग पर तीसरी परियोजना प्रगति पर है । इन दोनों देशों ने हमेशा ही अपनी सीमाओं को मजबूत व इसे कायम रखने के लिए अथक प्रयास किए हैं और अपनी इस दोस्ती को किसी मुद्दे के कारण प्रभावित नहीं होने दिया । इनमें चाहे जितनी भी बाधाएं आई, ये संबंध हमेशा दृढ़ , मजबूत व शक्तिशाली बने रहे और आने वाले समय में यह और विकसित होंगे।।।।

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