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कभी थे इंदिरा गाँधी के अध्यात्मिक गुरु , अब लगा ये गंभीर आरोप

नई दिल्ली

आर्थिक अपराध शाखा ने आश्रम के ट्रस्ट और कथित फर्जी खरीदारों के ऊपर केस दर्ज कर लिया है। साथ ही, संस्था के ट्रस्ट अपर्णा आश्रम ट्रस्ट पर एक खरीदार से समझौता पूरा हुए बिना दूसरे खरीदार को बेचने का गंभीर आरोप भी है।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आध्यात्मिक गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी के आश्रम पर भूमि बिक्री के मामले में टैक्स चोरी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। धीरेंद्र ब्रह्मचारी के आश्रम की गुरूग्राम में 23.9 एकड़ की यह भूमि आज की बाजार दरों में लगभग दो हजार करोड़ रूपये की है, जबकि कुछ लोगों की मिली भगत से इसे केवल 55 करोड़ का बताकर बेचा जा रहा था।

संज्ञान मे मामला आते ही किया केस दर्ज

मामले का संज्ञान लेते हुए आर्थिक अपराध शाखा ने आश्रम के ट्रस्ट और कथित फर्जी खरीदारों के ऊपर केस दर्ज कर लिया है। साथ ही, संस्था के ट्रस्ट अपर्णा आश्रम ट्रस्ट पर एक खरीदार से समझौता पूरा हुए बिना दूसरे खरीदार को बेचने का गंभीर आरोप भी है।

दरअसल, धीरेंद्र ब्रह्मचारी का यह आश्रम गुरुग्राम, हरियाणा के सिलोखरा गांव में 23.99 एकड़ भूमि पर बना हुआ है। उन्होंने इसे 1973 में बनाया था। इसका संचालन उनके नेतृत्व में बनी एक सोसाइटी अपर्णा आश्रम सोसाइटी के जरिए की जाती थी। उनके अलावा इस सोसाइटी में मुरली चौधरी, रेनू चौधरी, श्याम शर्मा और केके सोनी थे। ब्रह्मचारी के देहावसान के बाद संस्था के देखभाल की जिम्मेदारी मुरली चौधरी के हाथों में आ गई थी।

2010 मे ट्रस्ट ने एक हिस्से को बेचने का  लिया था निर्णय

वर्ष 2010 में ट्रस्ट ने अपनी भूमि के एक बड़े हिस्से को बेचने का निर्णय किया था। अधिवक्ता गौरव पुरी ने अमर उजाला को बताया कि इस आश्रम की 75 प्रतिशत भूमि की बिक्री करने का एक सौदा स्प्लेंडर ग्रुप नाम की कंपनी के साथ 2010 में किया गया था। यह सौदा 300 करोड़ रूपये में हुआ था। आश्रम को 50 लाख रूपये एडवांस देते हुए कंपनी ने बाकी की राशि आवश्यक लाइसेंस मिल जाने के बाद बिक्री के समय देना नियत किया था। लेकिन आरोप है कि इस समझौते को अंजाम पर पहुंचाए बिना आश्रम ने इसी भूमि को 24 दिसंबर 2020 को दिल्ली की चार अन्य कंपनियों को बेच दी।

स्प्लेंडर ग्रुप एक बिल्डर-डवलपर कंपनी है जो दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ देश के कई अन्य हिस्सों में भूमि का विकास, भवन निर्माण और उनकी खरीद-बिक्री का काम करती है। अधिवक्ता गौरव पुरी ने कहा कि आश्रम ने इस भूमि की बिक्री के लिए भी गैरकानूनी तरीके का इस्तेमाल किया था।

इसे बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्री की बजाय ऑफ लाइन माध्यम से रजिस्ट्री करने की अनुमति मांगी गई। इस लेनदेन में भी भूमि को केवल 55 करोड़ का बताकर बेचने की कोशिश हुई। इसके माध्यम से भारी टैक्स की चोरी हुई। हरियाणा सरकार ने भी इसके बारे में कार्रवाई शुरू कर दी है।

आरोप यह भी है कि आश्रम ने जिन चार कंपनियों को भूमि बेची है- रैडॉक्स ट्रेडेक्स प्रा. लि., एसएस प्रीमियम होम्स प्रा. लि., रोजमेर्टा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. और स्टार केयर रियल स्टेट प्रा. लि. ये सभी शेल कंपनियां हैं। असलियत में ये कंपनियां कोई कामकाज नहीं करती हैं। इनका उपयोग केवल भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त के लिए किया गया है।

इन चारों कंपनियों के मालिकों के रूप में अमित कात्याल, संजीव नंदा, प्रीती नंदा, विनोद अंबावत्ता, विवेक नागपाल और अन्य को बताया गया है। आर्थिक अपराध शाखा ने इन सभी लोगों को केस में आरोपी बनाया है। इसके साथ ही अपर्णा आश्रम ट्रस्टीज और दामोदर कारपोरेशन को भी पक्षकार बनाया गया है।

इस मुद्दे पर अपर्णा आश्रम का पक्ष जानने के लिए संजीव नंदा, विनोद अंबावत्ता, अंकुर सैकिया और आरआर सैकिया से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी भी सदस्य ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

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