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अल्पसंख्यक अधिकार दिवस पर पढ़िए संपादकीय कॉलम

नई दिल्ली ( Sonu Chaudhary )

हर वर्ष दिसंबर 18 को ‘अल्पसंख्यक अधिकार दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है जिसका उद्देश्य अल्पसंखयक समुदायों में संरक्षा, सुरक्षा, न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा भाईचारे की भावना को मज़बूत करना व समझना है। प्रत्येक अल्पसंखयक समुदाय अपनी संस्कृति सभ्यता भाषा धर्म व धार्मिक स्थानों से प्रेम करता है जिसके लिए विभिन्न स्तर पर अनेकों कार्यक्रमों और सेमिनारों का आयोजन किया जाता रहा है ताकि संबंधित क्षेत्रों में उनके अधिकारों को सुगम बनाया जा सके। मुख्य तौर पर राष्ट्रीय अल्पसंखयक आयोग तथा अल्पसंखयक मामलों का मंत्रालय अल्पसंखयक समुदायों से संबंधित सर्वेक्षणों और अनुसंधानों पर कड़ी नज़र रखते हैं ताकि उनके मानवाधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके। अल्पसंखयक समुदायों की रक्षा व सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विश्वभर में मानवाधिकार सबसे संवेदनशील मुद्दा है जिसे लागू करने के लिए बहस होती रहती है। असल में भारत एक ऐसा देश है जो लाखों अल्पसंखयक लोगों को पनाह देता है जो अपनी संस्कति को संरक्षित कर रहे हैं तथा अपनी धार्मिक प्रथाओं व रीति-रिवाजों को अपने धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक निभा रहे हैं और जिसे भारतीय संविधान में गारंटी दी गई है।  वे भारतीय संविधान की आत्मा जैसे – न्याय, स्वतंत्रता, भाईचारा व समानता का आनंद उठा रहे हैं। भारत के प्रमुख अल्पसंखयक समुदायों में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी व जैन आते हैं। विभिन्न राज्यों में इनका प्रतिशत भी असामान्य है। ये सभी समुदाय अपनी पूजा पद्धति को अपने धार्मिक स्थलों में करने के लिए स्वतंत्र हैं तथा उन्हें अपने शैक्षणिक संस्थान व अन्य लोक भवनों का निर्माण करने का भी अधिकार प्राप्त है ताकि वे अपने समुदाय का कल्याण कर सकें। भारत में सभी अल्पसंखयक समुदाय हर प्रकार का लाभ उठा रहे हैं जिनमें नौकरियां, आरक्षण, शिक्षा और अल्पसंखयक उत्थान के लिए विशेष पैकेज प्राप्त करना शामिल है।  भारतीय संविधान में इनके वे सभी अधिकार निहित किए गए हैं जो इनके विकास को सुनिश्चत करते हैं और उन्हें विभिन्न प्लेटफार्मों पर कार्य करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा, रक्षा सेवा, नौसेना तथा अन्य सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।  यह इसीलिए संभव हो पाया है क्योंकि उन्हें बहुसंख्यक समुदायों की भांति ही समान अधिकार मिले हैं।  कई भारतीय नौकरियों में अल्पसंख्यकों को विशेष लाभ दिए गए हैं जो उनकी जाति के कारण दिए गए आरक्षण के कारण संभव हो पाया है। भारत एक ऐसा देश है जो अपने अल्पसंखयक समुदय को बिना जाती, नस्ल, रंगभेद के सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाता है और उनके लिए देश में मौजूद अवसरों को समानता के आधार पर सुनिश्चित करता है।  कंधे से कंधा मिलाकर ये समुदाय एक ऐसी बुनियाद की रचना करते हैं जिसने भारत को वर्षों से मजबूती प्रदान की है।इस ‘अल्पसंखयक अधिकार दिवस’ के मौके पर हमारे विद्वान और राजनैतिक लोग इनके अधिकारों को लेकर व्याख्यान देते हैं।

अपने अधिकारों का आनंद उठाते हुए मुसलमानों को देश के संपूर्ण विकास व अखंडता के लिए अपना सहयोग देना चाहिए क्योंकि एक नागरिक होने के नाते हम सब पर भारत को विकास व तरक्की की ओर ले जाने की पूर्ण जिम्मेदारी है।  वैसे तो अल्पसंखयक समुदायों का योगदान अतुल्य व अनूठा है किंतु उनसे और उम्मीद कि जाती है।

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बीते कुछ समय मेंअल्पसंखयक समुदायों के  विरुद्ध जघन्य व घटनाएं हुईं हैं, किंतु गहन अध्ययन से यह पता चलता है कि ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले सिर्फ कुछेक समूह ही हैं और संपूर्ण बहुसंख्यक समुदाय का इसमें कोई लेना देना नही है। इसे पूरे भारतवर्ष पर लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि भारतीय संविधान इनके अधिकार, समानता, न्याय, आज़दी और अपने ईष्ट देवता की पूजा अर्चना करने की पूरी स्वतंत्रता देता है।  मोटे तौर पर अल्पसंखयक समुदाय अपने त्योहारों को अपने बहुसंख्यक समुदायों के साथियों की तरह पूरी श्रद्धा एवं जोरशोर से मनाते हैं। आज आवश्यकता है कि हम अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक करें क्योंकि जोशीले रवैये से हमेशा नुकसान ही होता है।

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