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जनसंख्या रजिस्टर क्यों है जरूरी , पढ़िए संपादकीय विशेष

नई दिल्ली

देव श्योकंद

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें असम को छोड़कर सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल से सितंबर 2020 के द्वारा जनगणना- 2021 के अंतर्गत मकानों को सूचीबद्ध चरण में नवीनीकरण किया जाना था। इसका उद्देश्य पिछले दशक में जनसंख्या की वृद्धि को देखना, भारतीय नागरिक व उसकी आजीविका की स्थिति की पहचान करना था ताकि सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाएं और कार्यक्रम उपलब्ध कराया जा सके व सुविधाओं से वंचित लोगों के स्तर को उठाया जा सके। नागरिकों के प्रश्नों का संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में स्वयं को पंजीकृत करवाने के लिए कोई दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है बल्कि उनके द्वारा दी गई कागजी सबूतों पर आधारित जानकारी ही पंजीकृत करवाने हेतु काफी होगी।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर हाल की प्रक्रिया नहीं है। यूपीए-2 सरकार के अंतर्गत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए आंकड़ों को सर्वप्रथम सन 2010 में इकट्ठा किया गया था। इसके साथ ही जनगणना 2011 के दौरान मकानों को सूचीबद्ध करने के चरण के साथ ही से जोड़ा गया था। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि सरकार कुछ लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रत्येक व्यक्ति का ऑनलाइन डाटा बनाने की योजना बना रही है। जिसमें कागजातों की अधिकता को कम करना, वजीफा, नौकरी, रियायती- अनाज और गैस आदि की सुविधा प्रदान करने हेतु उनके दोहराव से बचना इत्यादि शामिल है। इनके अलावा, प्रत्येक नागरिक की पहचान करने के बाद देश की सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा जिससे घुसपैठियों और देश विदेशी एजेंटों के लिए अवसर कम हो जाएंगे। वर्तमान राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर अपराधिक और हिंसक मामलों में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता का पता लगाने के लिए सबसे प्रमाणिक और विश्वसनीय स्रोत साबित होगा। अमेरिका का ‘सामाजिक सुरक्षा नंबर’ और ‘अमेरिकी कार्ड’ इस संबंध में एक आदर्श उदाहरण है। इसने अमेरिका को अपने नागरिकों की देखभाल करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाना बहुत आसान बना दिया है।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का विरोध करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि देश के प्रत्येक नागरिक को नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 14 A, जो 2014 में संशोधित की गई थी, के अंतर्गत भारत के राष्ट्रीय रजिस्टर में पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। भारत का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते यह सभी की जिम्मेदारी है कि बिना किसी विरोध और शोर-शराबा किए अपनी उचित जानकारियों को एनपीआर पंजीकरण के समय दर्ज कराएं, क्योंकि लंबे समय में नागरिकों के लिए यह फायदेमंद होगा। पिछले NPR की घोषणा के बाद अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा विरोध के सुर उठे थे क्योंकि उन्हें राजनीतिक हित से प्रेरित लोगों द्वारा गुमराह किया गया था। हालांकि गौर से देखने पर पता चलेगा कि एनपीआर के माध्यम से इकट्ठा किया गया डाटा अंततः लोगों के फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। ‘मतदाता पहचान पत्र’ , ‘आधार कार्ड’ सहित विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर एक भारतीय नागरिक की पहचान पहले साबित हो चुकी है। एनपीआर सभी उपलब्ध सूचनाओं के समायोजन व संकलन मात्र करेगा । उन लोगों के लिए कई रास्ते खुल जाएंगे जो भारतीय नागरिक होने के बावजूद आवश्यक दस्तावेजों से वंचित है। केवल जाली दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता का दावा करने वालों और अपने लाभ के लिए सरकारी धन लूटने वालों को ही चिंता करने की जरूरत है।

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