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राव इंद्रजीत ने प्रदेश की सियासत मे बड़े बदलाव की और किया इशारा , पढ़िए सियासी अपडेट !

चंडीगढ़

देव श्योकंद

हरियाणा के झज्जर में शहीदी दिवस पर हुई रैली में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अपने संबोधन के दौरान कई सियासी समीकरणों की ओर इशारा किया। उन्होंने भीड़ जुटाकर जहां अहीरवाल से बाहर निकलकर लड़ाई लड़ने की बात की, वहीं पंडाल में मौजूद ओपी धनखड़ के माध्यम से हाईकमान तक भी संदेश पहुंचाया। वहीं अप्रत्यक्ष तौर पर उन्होंने हरियाणा का नेतृत्व करने की अपनी इच्छा भी जताई। राव ने उम्रदराज होने के विरोधियों के सवाल का जवाब दिया और कहा कि वह अभी स्वस्थ हैं और इतनी जल्दी राजनीति नहीं छोड़ने वाले। अभी भी उन्हें नेतृत्व मिलने की उम्मीद हैं।

राव ने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा लेकिन पैराछूट से नेता उतारने का जिक्र कर प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाया। राव ने जिक्र किया कि नेता बनने के दो तरीके हैं, एक तो नीचे से चुनाव लड़कर आते हैं और दूसरे पैराछूट से उतारे जाते हैं। राव ने कहा कि उन्हें फख्र है कि वह जमीनी स्तर से उठे और चुनाव लड़कर आगे आए हैं। राव ने मंच से जिक्र किया कि भजनलाल सरकार में वह पहली बार मंत्री बने थे। गांवों में जाता तो बहुत कम लोग जानते थे। ग्रामीणों ने जब पूछा तो बताया कि मैं राव बीरेंद्र सिंह का बेटा हूं।

इसके बाद ग्रामीणों की आवाज थी कि यह तो उसका बेटा है, जिसके नाम से नारा आज तक लिया जाता है, “राव आया-भाव आया।’ राव ने कहा कि भले ही थोड़े दिन के लिए मुख्यमंत्री बनो, लेकिन जनता की बात सुनो और उनके काम भी करो। भाषण के दौरान राव ने नसीबपुर की लड़ाई की बात भी की। जनता से कहा कि नसीबपुर यानी अहीरवाल की लड़ाई लड़ ली अब पानीपत की भी लड़ाई लड़ें। उन्होंने सीधा संकेत देने का प्रयास किया कि अब वह अहीरवाल में ही सिमटकर नहीं रहना चाहते।

इसलिए जोड़ा संघ का नाम

राव इंद्रजीत के संबोधन की राजनीतिक गलियारों में जोरों से चर्चा है। मंच पर मौजूद पार्टी प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की ओर इशारा कर उन्होंने जिक्र किया कि पंडाल में संघ के लोग बैठे हैं इसलिए उनकी हर बात हाईकमान तक भी पहुंचेगी। उन्होंने 2019 के चुनाव में रेवाड़ी सीट हारने का जिक्र करते हुए पार्टी पर ही सवाल खड़े करते हुए पार्टी के बीच कुछ जयचंद होने की बात कही। वहीं उन लोगों की अनदेखी की बजाय सरकार बनने के बाद इनाम देने की बात कहते हुए नेतृत्व पर सवाल उठाया।

राव ने रैली के दौरान राजाशाही पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने मंच से जिक्र किया कि कुछ लोग उन्गहें राजाशाही परिवार से बताते हैं लेकिन राजाशाही तो अंग्रेजों ने छीन ली थी। अगर कोई उन्हें राजा कहता है तो वो इसलिए क्योंकि उनके दिलों में हमारे परिवार के प्रति प्रेम है। अपने पिता पूर्व CM राव बीरेंद्र सिंह की राजनीति के साथ उन्होंने अपनी 40 साल की राजनीति पर बात की। साथ ही कहा कि अगर जीतने के बाद जनता के बीच नहीं जाते तो उन्हें 5 बार सांसद और 4 बार विधायक जनता कैसे चुनती।

खुले विकल्प की तरफ भी इशारा कर गए कद्दावर नेता

पाटौदा रैली में राव इंद्रजीत सिंह की बेटी और भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आरती राव ने भी मंच से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। वहीं खुद राव इंदरजीत सिंह ने भी अभी राजनीति से सन्यास न लेने की मंशा जाहिर की। दोनों ने हाईकमान को संकेत देने का प्रयास किया कि इस बार दबाव झेलने की बजाया सीधे चुनौती देने के मूड में हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव में आरती राव का टिकट पार्टी ने परिवारवाद को बढ़ावा न देने की बात कहते हुए काट दिया था। वहीं भाजपा में उम्र दराज नेता धीरे-धीरे मार्गदर्शन मंडल में भेज दिए जाते हैं। ऐसे में आरती राव का चुनाव लड़ने और 70 साल के राव का राजनीति जारी रखने का ऐलान संकेत दे रहा है कि भाजपा हाईकमान ने बात नहीं मानी तो दूसरे विकल्प पर विचार किया जाएगा।

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