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हाँसी की SP ने हाईकोर्ट में कहा – युवराज सिंह ने किया है दलित वर्ग का अपमान , पढ़िए क्या है पूरा मामला

चंडीगढ़ । 

देव श्योकंद 

क्रिकेटर युवराज सिंह के खिलाफ हांसी में SC/ST एक्ट के तहत दर्ज FIR के मामले में बुधवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में हांसी की SP नीतिका गहलोत ने हलफनामा दायर करके मामले की स्टेटस रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में SP की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि जिस शब्द का इस्तेमाल क्रिकेटर युवराज सिंह ने किया था, वह हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में केंद्र के गजट के अनुसार दलित वर्ग से संबंधित है। यह सीधे-सीधे तौर पर दलित वर्ग का अपमान है।

इनकी शिकायत पर 8 महीने में दर्ज हुआ था केस
हरियाणा के हांसी में पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह के खिलाफ 14 फरवरी 2021 को हांसी में SC/ST एक्ट में केस दर्ज किया गया था। यह केस नेशनल अलायंस और दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कलसन की शिकायत पर दर्ज किया गया है, जिन्होंने 2 जून 2020 को शिकायत दायर की गई थी। कलसन के मुताबिक युवराज सिंह ने दलित वर्ग को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। इस शिकायत पर कार्रवाई करने में लगभग 8 महीने का वक्त लग गया।

युवराज सिंह की सफाई
इसके बाद युवराज सिंह की तरफ से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई तो कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। युवराज सिंह ने बताया था कि 1 अप्रैल 2020 को वह सोशल मीडिया पर अपने साथी रोहित शर्मा के साथ चैट कर रहे थे। इस दौरान लॉकडाउन को लेकर चर्चा के दौरान उन्होंने मजाक में अपने साथी युजवेंद्र सिंह और कुलदीप यादव को कुछ शब्द कह दिए थे। यह वीडियो वायरल हो गया और इसके साथ यह संदेश जोड़ा गया कि यह अनुसूचित जाति वर्ग का अपमान है।

युवराज सिंह ने कहा कि वह शब्द उन्होंने अपने दोस्त के पिता के शादी में नाचने पर टिप्पणी के रूप में कहे थे जो मजाकिया अंदाज में थे। इस स्पष्टीकरण के बावजूद FIR दर्ज कर ली गई। युवराज को अंतरिम जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि लोगों को ऐसी बातें करने से बचना चाहिए, जिसका कोई गलत मतलब निकले। यह बात मशहूर लोगों के मामले में ज्यादा लागू होनी चाहिए।

पुलिस ने की स्टेटस रिपोर्ट दायर
बुधवार को हाईकोर्ट में पुलिस की ओर से बताया गया कि युवराज सिंह जांच में शामिल हो चुके हैं। अभी तक की जांच में एक सर्वे करवाया गया था कि युवराज द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द के क्या मायने हैं। स्थानीय लोगों के बीच से इस सर्वे से सामने आया कि यह शब्द अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अपमानजनक शब्द के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही पुलिस ने दलील दी कि सर्च करने पर भी गूगल यह बताता है कि यह सब दलित वर्ग के लिए अपमानजनक टिप्पणी के रूप में इस्तेमाल होता है।

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