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साधन संपन्न बच्चों की आंखों में होते हैं उन्नति और विकास के सपने , पढ़िए संपादकीय विशेष !

साधन संपन्न बच्चों की आँखों में विकास और उन्नति के सपने होते हैं ।यह बात मुस्लिम परिवारों में जन्म लेने वाले बच्चों में भी दिखीं जा सकती है ।किंतु इन बच्चों में अक्सर बेहद ग़रीबी की वजह से उनके सपने व इच्छाएँ पूरी नहीं हो पाते हैं । साधनों की कमी और ग़रीबी की जंजीरों से छुटकारा पाने की इच्छा के कारण ये बच्चे अक्सर मदरसों में पढ़ने के लिए बाध्य होते हैं । ये मदरसे मौलिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के भी एक मात्र विकल्प होते हैं ।
क़ुरान की विभिन्न आयतें , मुसलमानों से ख़ास तौर पर शिक्षा प्राप्त करने का आवाहन करती है ।बहरहाल ,इन बच्चों की वित्तीय स्थिति के कारण ज़्यादातर मुस्लिम बच्चे आधुनिक व तकनीकी शिक्षा जो बहुत महँगी होती है पाने से वंचित रह जाते हैं । यद्यपि इंटरनेट की उपलब्धता और विद्युतीकरण के कारण ज्ञान तथा साक्षरता के महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने में मदद मिली है जो विभिन्न कारणों से इस आधुनिकता से अछूते रह गए थे । धीरे धीरे किन्तु लगातार इन लोगों ने यह महसूस किया है कि शिक्षा ही एक मात्र वह सशक्त हथियार है जो इन्हें इस तेज़ी से बढ़ती दुनिया में आगे बढ़ने में सहायक होगा ।बहुसंख्यक मुसलमानों को अल्पसंख्यकों के कल्याण से संबंधित चलायी जाने वाली परियोजनाएं व सरकारी कार्यों की जानकारी होने लगी है और यह क़दम तथा योजनाएं अब भी उन कुछ ग़रीब मुसलमानों तक पहुँचने में नाकाम रहे हैं जो ‘मदरसा शिक्षा प्रणाली ‘को एक मात्र सस्ती शिक्षा प्रणाली मानते हैं ।
हज़रत मुहम्मद ने मदीना में बच्चों को क़ुरान व हदीस पढ़ाने के लिए वहाँ की कई मस्जिदों में निःशुल्क शिक्षा प्रणाली स्थापित की थी । यह परंपरा मुस्लिम दुनिया में जारी रही तथा आगे चल कर यह मकतब (प्राथमिक विद्यालय ) की प्रणाली में तब्दील हो गयी । इन मस्जिद-सह-मकतबों में इमाम अध्यापक का रोल निभाते हैं जो बच्चों को मुफ़्त शिक्षा देते हैं ।मकतब या मकतब प्रणाली ने पिछले दशकों में बड़े सुचारु ढंग से अपने पैर पसार तब जाकर आज की मदरसा शिक्षा प्रणाली उभर कर सामने आयी है ।ये मदरसे ,प्राथमिक, पूर्व प्राथमिक, माध्यमिक ,वरिष्ठ माध्यमिक श्रेणियों में बाँटे गए आगे चलकर एक पारंपरिक विद्यालयों की शिक्षण प्रणाली के रूप में विकसित हुए । इन मदरसों में गरीब मुस्लिम बच्चे क़ुरान, हदीस , फ़िक,उर्दू अरबी साहित्य,हिन्दी, अंग्रेज़ी ,गणित और इस्लामी सिद्धांतों पर शोध करने में शोध पत्र लिखने जैसे विषय है व विधाये सीखते हैं । कुछ प्रमुख मदरसे अब इन ग़रीब छात्रों को मुफ़्त शिक्षा तथा अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाते हैं क्योंकि उन्हें हर वर्ष धनी व सरोकार रखने वाले मुसलमानों द्वारा शिक्षा के उत्थान तथा मुस्लिम समाज की तरक़्क़ी के लिए ज़कात के तौर पर दान मिलता है ।
मोटे तौर पर, मदरसा शिक्षा प्रणाली आधुनिक शिक्षा प्रणाली को अपनाने में असफल रही है जिसके कई कारण गिनाए जा सकते हैं जैसे पारंपरिक अध्यापकों की सेवाएँ लेने हेतु पैसों का अभाव, मस्जिदों को सिर्फ़ धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करने में नाकामी तथा आधुनिक शिक्षा प्रणाली की ज़रूरतों को समझने में जागरूकता की कमी होना इत्यादि । इन कमियों को जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए ताकि मुसलमानों के साथ साथ पूरे देश का विकास हो सके।

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