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कहानी एक ऐसे जवान की जो मजहब के नाम पर सियासत करने वालो के मुँह पर तमाचा है , देखिए ये काॅलम

नई दिल्ली । ( सोनू चौधरी )

परमवीर चक्र विजेता वीर कम्पनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद मसऊदी (अब्‍दुल हामिद) (1 July 1933 – 10 September 1965) भारतीय सेना की ४ ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के आसल उत्ताड़ में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति प्राप्त की जिसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला।
1965 में पाकिस्‍तान ने भारत में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों के मद्देनजर ऑपरेशन जिब्राल्टर की शुरुआत की थी। इसके तहत पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ और हमला करने के साथ-साथ दूसरे मोर्चों पर भी भारत को घेरने की योजना बनाई थी। इस दौरान पकड़े गए पाकिस्‍तान के घुसपैठियों से इस बात का खुलासा हुआ था कि कश्मीर पर कब्जा करने की मंशा से पाकिस्‍तान 30 हजार जवानों को गुरिल्‍ला वार का प्रशिक्षण दिया है। 8 सितंबर 1965 को पाकिस्‍तान ने खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव पर जबरदस्‍त हमला किया। उन्‍होंने अकेले अपने ही दम पर 1965 में खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव में पाकिस्‍तान से हुए युद्ध में उसके सात पैटन टैंकों को उड़ा दिया था। इससे पहले इन पैटन टैंकों को अजय समझा जाता था। पाकिस्‍तान सेना की तरफ से शामिल इन टैंकों के आगे भारतीय सेना बेहद कमजोर थी। इन टैंकों से भारत की पैदल सेना का मुकाबला बेहद मुश्किल था अब्‍दुल हामिद ने अपनी गन माउंटेड जीप से एक-एक कर सात टैंकों पर सटीक निशाना लगाकर पाकिस्‍तान की आर्टिलरी के पांव उखाड़ दिए थे। 9 सितंबर को एक पाकिस्‍तान के पैटन टैंक ने अब्‍दुल हामिद की जीप को निशाना बनाकर जोरदार हमला किया जो सटीक निशाने पर जाकर लगा और अब्‍दुल हामिद अपनी जीप के साथ कई फीट ऊपर तक उछल गए। इस बार दुश्‍मन का गोला ठीक उनकी जीप पर लगा था और बो बुरी तरह से जख्‍मी हो गए थे। कुछ देर के बाद उन्‍होंने रणभूमि में ही दम तोड़ दिया। 10 सितंबर को उनके वीरगति को प्राप्‍त होने की आधिकारिक सूचना दी गई थी।

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