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सीएम क्षेत्र के नायब तहसीलदार के इस्तीफे के पीछे चल रही है ये बड़ी चर्चाएं

मात्र 2 साल सरकारी नौकरी करने के बाद हरियाणा के करनाल जिले के नायब तहसीलदार राहुल बूरा ने अचानक रिजाइन कर दिया। 7 दिन पहले करनाल तहसील के तहसीलदार निखिल सिंगला को विजिलेंस ने रिश्वत के आरोप में पकड़ा था।

इससे करीब 6 माह पहले तहसीलदार राजबख्श को भी विजिलेंस ने रिश्वत के आरोप में पकड़ा था।

अब नायब तहसीलदार ने जिस तरह से अचानक रिजाइन दिया, वह कई सवाल खड़े कर रहा है। पहला सवाल तो यह है कि क्या बुरा ने यह कदम डर की वजह से उठाया। दूसरा क्या उन पर कोई दबाव था, जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर पाए। या फिर भविष्य की चिंता?

वजह कुछ भी हो, लेकिन जिस तरह से बूरा ने अचानक इस्तीफा दिया, इसे लेकर करनाल ही नहीं प्रदेशभर में चर्चा हो रही है। जिस नौकरी के लिए लोग मारे-मारे फिरते हैं। उस नौकरी को अचानक छोड़ना सामान्य बात नहीं है। जिस तरह से करनाल तहसील के हालात चल रहे हैं, इस वजह से भी यह रिजाइन सामान्य घटना नहीं माना जा सकता।

करनाल CM मनोहर लाल का विधानसभा क्षेत्र है। इसके बाद भी तहसील के भ्रष्टाचार को लेकर लगातार उंगली उठती रही है। जिस तरह से एक छोटे से अंतराल में दो-दो तहसीलदार को विजिलेंस से गिरफ्तार किया, इससे भी यह तथ्य पुष्ट होता है कि किसी ने किसी स्तर पर गड़बड़ी है।

करनाल में लंबे समय से लैंडमाफिया सक्रिय है। इसमें सत्ता पक्ष के स्थानीय नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस के कई नेताओं और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत है। भ्रष्टाचार मिटाओ स्वच्छ समाज बनाओ समिति के अध्यक्ष अनुज सैनी ने बताया कि यहां लगातार अवैध कालोनियां विकसित हो रही है। एक गैंग लगातार सक्रिय है। इसमें भूमाफिया, हवाला कारोबारी और काले धन का लगातार इस्तेमाल हो रहा है। तहसीलदार राजबक्श और DTP विक्रम पर भी लैंड माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगा था। ऐसा हो सकता है कि राहुल डर गए हो, और उन्होंने पद छोड़ना ही उचित समझा हो।

क्या उन पर गलत काम करने का दबाव था। क्योंकि तहसीलदार के पकड़े जाने के बाद तहसील का चार्ज उनके पास ही था। रेवेन्यू मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट अजीत नरवाल ने बताया कि ऐसा हो सकता है कि विजिलेंस की कार्यवाही से वह दबाव में आ गए हो। यह भी संभव है कि उन पर गलत काम करने का दबाव बनाया जा रहा हो। जिस तरह से तहसील में विजिलेंस की जांच चल रही है, इस वजह से राहुल ऐसा कोई काम करने से बच रहे हो। वह दबाव बर्दाश्त नहीं कर पाए और नौकरी छोड़ गए। हालांकि एडवोकेट अजीत नरवाल ने बताया कि जिस तरह से सरकार ईमानदारी से काम कर रही है, ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित कर रही है, ऐसे में यदि राहुल पर कोई भी गलत करने का दबाव बना रहा था तो उसे उसकी शिकायत CM से करनी चाहिए थी। CM निश्चित ही उसकी बात सुनते।

एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि राहुल सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी। लेकिन यह तर्क इसलिए गले से नहीं उतर रहा कि यदि ऐसा है तो फिर इस तरह से रिजाइन करने का मामला तो उस वक्त भी उठेगा, जब वह सिविल सर्विस के इंटरव्यू के लिए जाएंगे। नौकरी करते हुए भी वह आसानी से सिविल सर्विस की तैयारी कर सकते थे। इसलिए जानकारों का मानना है कि रिजाइन करने के लिए यह उचित मौका तो नहीं है।

मंगलवार को जब नायब तहसीलदार राहूल बूरा ने नौकरी से इस्तीफा दिया तो तहसील व प्रशासन में हड़कप मच गया। राहुल ने अपना इस्तीफा SDM को दिया । SDM ने उन्हें काफी देर समझाया लेकिन वह नही माने। बाद में जब तहसीलदार नहीं माने तो SDM उन्हें DC अनीश यादव के पास लेकर गए। जहां पर कई अधिकारियों ने उन्हें समझाने का काफी प्रयास किया। लेकिन वह नहीं माने आखिर में DC ने तहसीलदार के इस्तीफे को मुख्यालय में भिजवा दिया। अब मुख्यालय ही तय करेगा की नायब तहसीलदार का इस्तीफा मंजूर करना है या नहीं।

अभी राहुल ने इस्तीफा दिया है, वह मंजूर नहीं हुआ है। सरकार तय करेगी कि इस्तीफा मंजूर करना है या नहीं। यह भी हो सकता है कि उनसे सीनियर अधिकारी भी इस मसले पर बातचीत करे। दूसरी ओर इस्तीफा देने के बाद नायब तहसीलदार कार्यालय से निकल गए। उन्होंने अपना फोन भी बंद कर लिया। DC अनीश यादव ने मंगलवार दोपहर बाद इस बात की पुष्टि थी कि नायब तहसीलदार ने रिजाइन कर दिया है।

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